श्री गायत्री यंत्र को स्थापित करने से प्राप्त होने वाले लाभ किसी जातक को पूर्ण रूप से तभी प्राप्त हो सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री गायत्री यंत्र शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा तथा उर्जा संग्रह की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो।शुद्धिकरण के पश्चात श्री गायत्री यंत्र को श्री गायत्री मंत्रो की सहायता से एक विशेष विधि के माध्यम से ऊर्जा प्रदान की जाती है जो मां गायत्री की शुभ ऊर्जा के रूप में इस यंत्र में संग्रहित हो जाती है। किसी भी श्री गायत्री यंत्र की वास्तविक शक्ति इस यंत्र को श्री गायत्री मंत्रो द्वारा प्रदान की गई शक्ति के अनुपात में ही होती है तथा इस प्रकार जितने अधिक मंत्रों की शक्ति के साथ किसी श्री गायत्री यंत्र को ऊर्जा प्रदान की गई हो, उतना ही वह श्री गायत्री यंत्र शक्तिशाली होगा। बिना उर्जा के संग्रह वाला श्री गायत्री यंत्र धातु के एक टुकड़े के समान ही होता है जिसे हम चंद मूल्य में प्राप्त किया जा सकता है।
विधिवत बनाया गया श्री गायत्री यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान या व्यापार जगह पर स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए श्री गायत्री यंत्र को बुधवार अथवा शुक्रवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने श्री गायत्री यंत्र को बुधवार अथवा शुक्रवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। श्री गायत्री यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र के सामने घी का दीपक पूरे दिन और रात जलाये। तत्पश्चात अपने श्री गायत्री यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें,तथा 11 या 21 बार श्री गायत्री मंत्र का जाप करे, मां गायत्री से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें।व्यक्ति को पूजा के दिन चावल, दूध और पानी लेना चाहिए. इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने श्री गायत्री यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 श्री गायत्री बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। अपने पास स्थापित किए गये श्री गायत्री यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके श्री गायत्री यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।
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