सोमवार, 12 अगस्त 2013

गायत्री पूजन यन्त्र



 माँ गायत्री को भगवती गायत्री भी कहा जाता है और  उनके पूजन यन्त्र को गायत्री पूजन यन्त्र ही कहा जाता है | मां गायत्री  को बुद्धि, ज्ञान, आध्यत्मिक विकास तथा समृद्धि आदि  के साथ जोड़ा जाता है  श्री गायत्री मंत्र का प्रयोग मां  गायत्री का आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए तथा अनेक  प्रकार के लाभ प्राप्त करने के लिए करता रहा है। इस यंत्र को स्थापित कर माँ गायत्री कि आराधना करने  वाले भक्तों को कभी भी किसी प्रकार की विपत्ति नहीं  आती है |गायत्री उपासना कभी भी, किसी भी स्थिति  में की जा सकती है । हर स्थिति में यह लाभदायी है,  परन्तु विधिपूर्वक भावना से जुड़े न्यूनतम कर्मकाण्डों  के साथ की गयी उपासना अति फलदायी मानी गयी है  । तीन माला गायत्री मंत्र का जप आवश्यक माना गया  है । शौच-स्नान से निवृत्त होकर नियत स्थान, नियत  समय पर, सुखासन में बैठकर नित्य गायत्री उपासना  की जानी चाहिए । और जो प्राणी भगवती गायत्री को विल्वपत्र पर तीन बार इस मायाबीज मंत्र "ह्रीं" को लिखकर "ऊँ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः " इस मंत्र को स्मरण करते हुए भगवती गायत्री को समर्पित (अर्पण) करता है | ऐसे भक्त माँ भगवती के कृपा के पात्र होते है और उनको सर्व सिद्धि और शांति कि प्राप्ति होती है | और साथ ही सम्मान और प्रशस्ति कि प्राप्ति भी होती है |  आज भी अनेक जातक श्री गायत्री मंत्र के विधिवत प्रयोग से अनेक प्रकार की मनोकामनाएं सिद्ध करते हैं। पौराणिक ज्योतिषी यह मानते हैं, कि इस यंत्र के माध्यम से  मां गायत्री के साथ मजबूत  संबंध स्थापित करके उनकी कृपा प्राप्त की जा सकती है। श्री गायत्री यंत्र के विधिवत प्रयोग के साथ कुछ अन्य विशेष प्रकार के उपाय करने से  जातकों के विभिन्न प्रकार के दोषों एवं कष्टों का निवारण होता है. तथा उन्हें  अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के शुभ फल तथा लाभ प्राप्त होते हैं।  श्री गायत्री यंत्र के प्रयोग का परामर्श, शिक्षा से संबंधित शुभ फल प्राप्त करने के लिए, सुख, समृद्धि, धन एवम सुरक्षा तथा अन्य बहुत सी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए देते हैं तथा इस यंत्र को विधिवत स्थापित करने वाले तथा इसकी विधिवत पूजा करने वाले जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार के लाभ प्राप्त कर पाने में सफल होते हैं।एक व्यक्ति या घर आत्मा और आत्माओं से पीड़ित है, तो पानी यन्त्र के पास एक कटोरी में रखा जाना चाहिए और वह पानी एक सप्ताह के लिए घर में छिड़का जाना चाहिए. यह सभी आत्माओं, आत्माओं और उनके साथ जुड़े नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाएगा.
     श्री गायत्री यंत्र को स्थापित करने से प्राप्त होने वाले लाभ किसी जातक को पूर्ण रूप से तभी प्राप्त हो सकते हैं जब जातक द्वारा स्थापित किया जाने वाला श्री गायत्री यंत्र शुद्धिकरण, प्राण प्रतिष्ठा तथा उर्जा संग्रह की प्रक्रियाओं के माध्यम से विधिवत बनाया गया हो।शुद्धिकरण के पश्चात श्री गायत्री यंत्र को श्री गायत्री मंत्रो की सहायता से एक विशेष विधि के माध्यम से ऊर्जा प्रदान की जाती है जो मां गायत्री की शुभ ऊर्जा के रूप में इस यंत्र में संग्रहित हो जाती है। किसी भी श्री गायत्री यंत्र की वास्तविक शक्ति इस यंत्र को श्री गायत्री मंत्रो द्वारा प्रदान की गई शक्ति के अनुपात में ही होती है तथा इस प्रकार जितने अधिक मंत्रों की शक्ति के साथ किसी श्री गायत्री यंत्र को ऊर्जा प्रदान की गई हो, उतना ही वह श्री गायत्री यंत्र शक्तिशाली होगा।  बिना उर्जा के संग्रह वाला श्री गायत्री यंत्र धातु के एक टुकड़े के समान ही होता है जिसे हम चंद मूल्य में प्राप्त किया जा सकता है। 

             विधिवत बनाया गया श्री गायत्री यंत्र प्राप्त करने के पश्चात आपको इसे अपने ज्योतिषि के परामर्श के अनुसार अपने घर में पूजा के स्थान या  व्यापार जगह पर स्थापित करना होता है। उत्तम फलों की प्राप्ति के लिए श्री गायत्री यंत्र को बुधवार अथवा शुक्रवार वाले दिन स्थापित करना चाहिए तथा घर में स्थापित करने की स्थिति में इसे पूजा के स्थान में स्थापित करना चाहिए। इसके अतिरिक्त आप अपने श्री गायत्री यंत्र को बुधवार अथवा शुक्रवार के दिन ही अपने ज्योतिष के परामर्श अनुसार अपने बटुए में, अथवा अपने गले में भी स्थापित कर सकते हैं। श्री गायत्री यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात अपने यंत्र के सामने घी का  दीपक पूरे दिन और रात  जलाये। तत्पश्चात अपने श्री गायत्री यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें,तथा 11 या 21 बार श्री गायत्री मंत्र का जाप करे, मां गायत्री से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तथा तत्पश्चात इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें।व्यक्ति को पूजा के दिन चावल, दूध और पानी लेना चाहिए. इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने श्री गायत्री यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 श्री गायत्री बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। अपने पास स्थापित किए गये श्री गायत्री यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके श्री गायत्री यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है।


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